सागर सोफे पर बैठा अपने हाथ देख रहा था—मेहंदी तो नहीं लगी थी, लेकिन जल्द ही लग सकती थी।
रिया ने उसके कान में फुसफुसाया, “सागर जी… अब आपने हाँ कह दिया… अब क्या होगा?”
सागर ने आँखें बंद करके जवाब दिया, “अब… अब स्वाति को भी बताना पड़ेगा कि उसका पति किसी और की मंगेतर बन चुका है।”
शांति देवी कमरे में वापस आईं और सागर के कंधे पर हाथ रखकर बोलीं,
“बिटिया, आज से तुम मेरी बहू हो। राकेश तुम्हें बहुत प्यार करेगा। और मैं भी।”
सागर ने मुस्कुराते हुए सिर झुकाया।
अंदर ही अंदर एक ही सवाल घूम रहा था—
ये रिश्ता पक्का हो गया है…
अब इसे तोड़ना कैसे है?
और सबसे बड़ा खतरा—
कल जब राकेश उसे अपने घर ले जाएगा…
अगली सुबह।
सागर अभी भी गुलाबी साड़ी में था। राकेश दस बजे आने वाला था उसे अपने घर ले जाने। शांति देवी ने पहले ही राकेश की माँ को बता दिया था कि “बहू” आ रही है।
तभी सागर के फोन पर स्वाति का कॉल आया।
रिया ने फुसफुसाया, “ले लो… अब क्या बोलोगे?”
सागर ने पतली आवाज़ में कॉल उठाया, “हेलो…”
दूसरी तरफ से स्वाति की खुशी भरी आवाज़ फूटी, “अरे अमिता जी! सुनो तो सही!”
सागर की आँखें फटी रह गईं। “त-तुम… कैसे…?”
स्वाति हँस पड़ी, “रिया ने मुझे सब बता दिया रात को! पूरा ड्रामा! सागर, तुमने रिश्ता पक्का कर लिया? राकेश को पसंद आ गई अमिता? वाह भई वाह! मेरा पति किसी और का मंगेतर बन गया!”
सागर ने गुस्से में फुसफुसाया, “स्वाति! ये मज़ाक नहीं है! अब वो मुझे अपने घर ले जा रहा है!”
“तो जाने दो न!” स्वाति ने mona मज़े लेकर कहा। “मैं आ रही हूँ। आधा घंटा लगेंगे। तुम्हें खुद तैयार करके भेजूँगी। मेरी सहेली की सास खुश है, रिश्ता पक्का हो रहा है, और तुम हो कि घबरा रहे हो? आज तो मैं तुम्हें दुल्हन बनाकर ही भेजूँगी!”
सागर ने फोन रख दिया तो रिया ने सिर पकड़ लिया। “अब स्वाति भी आ रही है… और खुश है?!”
पैंतालीस मिनट बाद स्वाति दरवाज़े पर थी। हाथ में मेकअप बैग, जूलरी बॉक्स और एक नई बनारसी साड़ी।
शांति देवी ने दरवाज़ा खोला तो स्वाति ने बड़े आराम से कहा, “नमस्ते माँ जी। मैं अमिता की… बहुत करीबी सहेली हूँ। रिया ने बताया सब। आज अमिता पहली बार ससुराल जा रही है न, तो मैं इसे तैयार करने आ गई।”
शांति देवी खुश हो गईं। “अरे बहू जैसी ही हो तुम भी! आओ, अमिता को और निखार दो।”
अगले एक घंटे में कमरे का नज़ारा कुछ ऐसा था—
स्वाति सागर को बिठाए हुए थी।
नई साड़ी पहनाई।
गले में हल्का हार, कानों में छोटे झुमके, हाथों में चूड़ियाँ।
माथे की बिंदी बड़ी कर दी।
होंठों पर थोड़ी और रंगत।
और सबसे खतरनाक बात—स्वाति ने सागर के बालों की विग में फूल भी लगा दिए।
“देखो कितनी प्यारी लग रही हो मेरी अमिता,” स्वाति आईने के सामने खड़ी होकर तालियाँ बजा रही थी। “राकेश तो पागल हो जाएगा।”
सागर ने दाँत पीसते हुए कहा, “स्वाति… मैं तुम्हें कभी माफ़ नहीं करूँगा।”
स्वाति ने कान में फुसफुसाया, “शhh… आज मज़ा लो। कल सोचेंगे कैसे निकले। अभी तो दुल्हन बनो।”
ठीक बारह बजे राकेश आया।
उसने अमिता को देखा तो एक पल के लिए बोलते-बोलते रह गया। नई साड़ी, जूलरी, फूल… वो पहले से भी ज्यादा प्रभावित हो गया।
“आप… और भी सुंदर लग रही हैं आज,” राकेश ने शर्माते हुए कहा।
स्वाति ने आगे बढ़कर राकेश से कहा, “राकेश जी, अमिता थोड़ी घबराई हुई है। पहली बार ससुराल जा रही है न। आप इसका ख्याल रखना। और… जल्दी से रोका-सगाई करवाइएगा।”
राकेश ने सिर हिलाया, “जी बिल्कुल। माँ भी बहुत उत्साहित हैं।”
शांति देवी ने आशीर्वाद दिया, “जाओ बिटिया। घर की लक्ष्मी बनकर आना।”
सागर ने आखिरी बार रिया और स्वाति की तरफ देखा। दोनों हँस रही थीं। स्वाति ने तो हाथ हिला-हिलाकर विदाई भी कर दी।
राकेश की कार में बैठते हुए सागर ने खिड़की से बाहर देखा। स्वाति खड़ी-खड़ी फोटो खींच रही थी और बोल रही थी, “मेरी अमिता ससुराल जा रही है! शुभ हो!”
कार चल दी।
बीस मिनट बाद राकेश का घर आ गया। दो मंज़िला मकान। दरवाज़े पर राकेश की माँ (शांति देवी की ननद) और कुछ रिश्तेदार खड़े थे।
जैसे ही सागर गाड़ी से उतरा, राकेश की माँ ने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया।
“अरे वाह! बिल्कुल वैसी जैसी फोटो में थी… बल्कि और अच्छी!” उन्होंने सागर को गले लगा लिया। “आओ बहू, घर की पहली पूजा तुमसे ही करवाएँगे।”
सागर अंदर घुसा। घर में औरतें घेरे खड़ी थीं। कोई उसके कपड़े देख रही थी, कोई चेहरा, कोई हाथ।
राकेश की माँ ने घोषणा कर दी, “आज ही रोका कर देते हैं! राकेश, अंगूठी कहाँ है?”
राकेश ने जेब से एक छोटी सी अंगूठी निकाली।
सागर की आँखें फटी रह गईं।
“अभी… अभी रोका?” उसने पतली आवाज़ में पूछा।
“हाँ बिटिया,” राकेश की माँ मुस्कुराईं। “जब लड़का-लड़की दोनों राज़ी हैं, और बुआ जी ने भी पक्का कर दिया है, तो देर किस बात की?”
राकेश ने सागर का हाथ पकड़ा और अंगूठी अंगूठे में पहनाने के लिए आगे बढ़ा।
बिल्कुल उसी पल सागर के फोन पर मेसेज आया।
स्वाति का—
“अंगूठी पहन ली क्या? फोटो भेजो दुल्हन वाली! मैं तैयार हूँ अगला ड्रामा देखने के लिए ”
सागर ने आँखें बंद कर लीं।
अंगूठी उसके अंगूठे में सरक रही थी…
और बाहर स्वाति और रिया दोनों फोन पर लाइव लोकेशन ट्रैक कर रही थीं।
अब सवाल ये था—
अंगूठी पहनने के बाद सागर कैसे निकलेगा इस रिश्ते से?
और जब राकेश की माँ “बहू” को रसोई में ले जाकर खाना बनाने को कहेंगी…
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