Friends · Hindi

दोस्त की पत्नी

दोस्त की पत्नी Cover Image
In Progress | Part 4 of 6 | 0 Likes

Part 4

Part 4 Image

शादी का दिन
आखिरकार वह दिन भी आ गया जिसका सभी को इंतज़ार था। घर को फूलों, रोशनी और रंग-बिरंगी सजावट से सजा दिया गया। सुबह से ही रिश्तेदारों की आवाजाही लगी हुई थी।
विद्या को दुल्हन के रूप में तैयार किया गया। लाल रंग के खूबसूरत जोड़े, गहनों, चूड़ियों और माथे की बिंदी के साथ वह सबके बीच बैठी थी। सोनिया अपनी भाभी की सजावट देखकर बेहद खुश थी।
शाम को पंडित जी ने विवाह की रस्में शुरू करवाईं। राज दूल्हे के रूप में मंडप में बैठा और विद्या उसके सामने आकर बैठ गई। मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने विवाह की रस्में पूरी कीं।
जब फेरे शुरू हुए तो राज के मन में कई तरह के विचार चल रहे थे। जिस बात को उसने एक छोटे से नाटक की तरह शुरू किया था, वह अब पूरे परिवार के सामने एक वास्तविक विवाह समारोह का रूप ले चुकी थी।
सुमित्रा और रंजीत अपने बेटे और बहू को आशीर्वाद दे रहे थे। सोनिया खुशी से अपनी भाभी को देख रही थी। रिश्तेदार भी नवविवाहित जोड़े को बधाइयाँ दे रहे थे।
सात फेरे पूरे होने के बाद पंडित जी ने दोनों को आशीर्वाद दिया। राज ने विद्या की ओर देखा। दोनों के बीच एक पल के लिए नज़रें मिलीं और उन्हें एहसास हुआ कि अब कहानी एक ऐसे मोड़ पर पहुँच चुकी थी, जहाँ आगे का रास्ता पहले से कहीं अधिक कठिन होने वाला था।
शादी की रस्में पूरी होने के बाद घर में खुशी का माहौल था, लेकिन विद्या के मन में बेचैनी बढ़ती जा रही थी। जिस राज़ को उसने और राज ने कुछ दिनों के लिए छिपाने की सोची थी, वह अब परिवार के सामने एक रिश्ते का रूप ले चुका था।
रात को विद्या अपने कमरे में अकेली बैठी सोच रही थी। सुमित्रा उसे अपनी बहू मान चुकी थीं, रंजीत ने उसे परिवार का हिस्सा समझ लिया था और सोनिया तो उसे अपनी सगी भाभी की तरह चाहने लगी थी।
तभी राज कमरे में आया। विद्या ने धीमी आवाज़ में कहा, “राज, अब हम क्या करेंगे? तुम्हारे परिवार ने मुझे सचमुच अपनी बहू मान लिया है। अगर उन्हें सच्चाई पता चली तो न जाने क्या होगा।”
राज कुछ देर चुप रहा। उसके पास भी कोई आसान जवाब नहीं था।
विद्या ने आगे कहा, “सबसे ज्यादा डर मुझे माँ जी और सोनिया के लिए लग रहा है। उन्होंने मुझ पर इतना भरोसा किया है। मैं उन्हें दुखी नहीं करना चाहती।”
राज ने उसे भरोसा दिलाने की कोशिश की, “हम कोई रास्ता जरूर निकालेंगे।”
लेकिन विद्या के मन में एक और सवाल उठ रहा था—क्या यह सब सिर्फ एक नाटक रह गया था, या अब इस रिश्ते ने दोनों की ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया था?
उधर बाहर परिवार के लोग अगले दिन की रस्मों की तैयारी कर रहे थे। विद्या ने खिड़की से बाहर देखा और महसूस किया कि उसका असली संघर्ष अब शुरू हुआ था।
रात गहराती जा रही थी, लेकिन विद्या की आँखों से नींद कोसों दूर थी। उसके मन में दो भाव एक साथ चल रहे थे।
एक तरफ उसे लगातार डर सता रहा था कि कहीं उसका राज़ परिवार के सामने न खुल जाए। अगर सुमित्रा, रंजीत या सोनिया को सच्चाई पता चल गई, तो उनका भरोसा टूट सकता था। उसे यह सोचकर ही बेचैनी होने लगी कि इतने प्यार से अपनाने वाले लोग अचानक उससे दूर हो जाएँगे।
दूसरी तरफ, इन कुछ दिनों में उसका इस परिवार से एक अलग ही रिश्ता बन गया था। सुमित्रा का उसे बेटी की तरह प्यार करना, रंजीत का उसे बहू मानकर सम्मान देना और सोनिया का हर बात उसके साथ साझा करना—इन सबने विद्या के मन को छू लिया था।
सोनिया की बातें याद करके विद्या की आँखों में हल्की मुस्कान आ गई। उसे याद आया कि कैसे सोनिया उसे अपनी सगी भाभी की तरह मानने लगी थी।
तभी राज कमरे में आया। उसने विद्या को परेशान देखकर पूछा, “क्या हुआ? तुम इतनी चुप क्यों हो?”
विद्या ने धीरे से कहा, “राज, मुझे डर भी लग रहा है और इस घर को छोड़ने का खयाल भी अच्छा नहीं लग रहा।”
राज कुछ पल चुप रहा। वह समझ गया कि बात सिर्फ उनका राज़ छिपाने की नहीं रह गई थी। विद्या सचमुच इस परिवार से जुड़ने लगी थी।
विद्या ने कहा, “हमने यह सब एक झूठ से शुरू किया था, लेकिन यहाँ के लोगों ने हमें सच्चा अपनापन दिया है। मैं नहीं चाहती कि हमारी वजह से किसी का दिल टूटे।”
राज ने गंभीर होकर कहा, “तो फिर हमें कोई ऐसा रास्ता ढूँढ़ना होगा जिसमें किसी के साथ धोखा न हो।”
दोनों देर तक चुप बैठे रहे। बाहर घर में शादी के बाद की खुशियों की आवाज़ें आ रही थीं, लेकिन कमरे के भीतर दोनों के सामने उनकी ज़िंदगी का सबसे कठिन फैसला खड़ा था।
अगली सुबह घर में फिर से शादी की तैयारियाँ शुरू हो गईं। परिवार ने तय किया कि राज और विद्या का विवाह मंदिर में पूरे रीति-रिवाज़ के साथ कराया जाएगा। सुमित्रा और रंजीत इस बात से बेहद खुश थे, जबकि सोनिया अपनी भाभी को तैयार करने में लगी हुई थी।
विद्या दुल्हन के कपड़ों में तैयार होकर आईने के सामने खड़ी थी। लाल साड़ी, माथे की बिंदी और माँग में सिंदूर देखकर वह कुछ पल तक खुद को देखती रही। बाहर से वह एक दुल्हन जैसी दिखाई दे रही थी, लेकिन उसके भीतर सवालों का तूफान था।

411 Views 0 Comments
Disclaimer

CD Stories is a multilingual open platform. Stories published are generated by writers. The platform has not reviewed, modified, or validated contents and holds no liability regarding content quality or copyright infringements.

Discussion (0)

No comments shared yet. Be the first to share your thoughts!
Want to comment? Please Login or Sign Up.
Reading preferences
100%
Home Discover 0 Alerts Writers Login