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दोस्त की पत्नी

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In Progress | Part 2 of 6 | 0 Likes

Part 2

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राज की बहन सोनिया बहुत चुलबुली और हँसमुख स्वभाव की थी। जब उसने राज के साथ एक लड़की को देखा, तो वह खुशी से बोली, “भैया, भाभी तो बहुत सुंदर हैं! आज मैं अपनी भाभी के साथ ढेर सारी बातें करूँगी। और हाँ भैया, आज आपको भाभी के साथ सोने की इजाज़त नहीं है!
सुमित्रा ने राज से कहा, “देखो बेटा, तुमने हमारी मर्ज़ी के बिना शादी की है। इसलिए अब तुम्हें हमारे सामने दोबारा शादी की रस्में निभानी होंगी। मैं कल ही पंडित जी से बात करूँगी। वैसे तुम्हारे पापा रंजीत भी जल्द ही घर आने वाले हैं। उन्हें भी बताऊँगी कि तुमने शादी कर ली है।”
राज यह सुनकर थोड़ा घबरा गया। उसने विद्या की ओर देखा। विद्या भी समझ गई कि अब उनके लिए यह नाटक पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल होने वाला था।
मुश्किलें अब और बढ़ गई थीं। राज और विद्या ने सोचा भी नहीं था कि बात इतनी जल्दी आगे बढ़ जाएगी। अब उन्हें न सिर्फ सुमित्रा के सामने अपने रिश्ते को निभाना था, बल्कि जल्द ही रंजीत के सामने भी इस शादी की सच्चाई छिपानी थी। दोनों एक-दूसरे को देखकर चिंतित हो गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या होगा।
वे दोनों अभी इसी चिंता में डूबे हुए थे कि तभी राज की बहन सोनिया विद्या के पास आई और उसका हाथ पकड़कर बोली, “भाभी, चलिए मेरे साथ। मुझे आपसे ढेर सारी बातें करनी हैं।”
विद्या कुछ कह पाती, उससे पहले ही सोनिया उसे अपने कमरे की ओर ले गई। राज वहीं खड़ा उन्हें जाते हुए देखता रहा और मन ही मन सोचने लगा कि अब आगे क्या मुसीबत आने वाली है।
सोनिया और विद्या रात भर बातें करती रहीं। सोनिया बड़े उत्साह से अपनी भाभी से पूछती रही कि उसकी और भैया राज की मुलाकात कैसे हुई और दोनों के बीच प्यार कैसे हुआ। वह यह भी बताती रही कि वह अपने भैया को कितना चाहती है और उनके लिए हमेशा खुशियाँ चाहती है।
बातों-बातों में विद्या ने सोनिया को बताया कि उसने कंप्यूटर का कोर्स किया था और साथ ही ब्यूटी पार्लर का कोर्स भी सीखा था। सोनिया उसकी बातें बड़े ध्यान से सुनती रही और दोनों के बीच पहली ही रात में अच्छी दोस्ती हो गई।
विद्या और सोनिया की बातचीत में मज़ाक-मस्ती का सिलसिला भी चलता रहा। दोनों ने अपने पसंदीदा गानों, फिल्मों, कॉलेज की शरारतों और रोज़मर्रा की मज़ेदार बातों पर खूब हँसी-मज़ाक किया। धीरे-धीरे रात काफी हो गई और दोनों को एहसास ही नहीं हुआ कि वे इतनी देर तक बातें करती रही थीं। विद्या ने भी सोनिया से उसकी निजी ज़िंदगी के बारे में पूछा, “सोनिया, क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? और पीरियड्स के दौरान तुम्हें किसी तरह की परेशानी तो नहीं होती?”
सोनिया थोड़ी झिझकी, फिर हँसते हुए बोली, “भाभी, आप भी ना! आज तो आपने मुझसे सारे राज़ ही पूछ लिए।” दोनों फिर हँसने लगीं और बातचीत का माहौल हल्का हो गया।
अगले दिन राज के पिता रंजीत घर वापस आ गए। जैसे ही उन्होंने घर में कदम रखा, सुमित्रा ने उन्हें राज की शादी के बारे में बताया। रंजीत ने हैरानी से राज की ओर देखा और फिर विद्या को गौर से देखने लगे।
राज थोड़ा घबरा गया, क्योंकि अब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—रंजीत को विद्या के बारे में विश्वास दिलाना। वहीं विद्या भी शांत खड़ी रही और मन ही मन उम्मीद करने लगी कि उसका राज़ किसी तरह सामने न आए।
रंजीत ने तुरंत पंडित जी को बुलाया और राज तथा विद्या की शादी के लिए दो दिन बाद का मुहूर्त निकलवा लिया। इसके बाद उन्होंने राज को उसकी मर्ज़ी से शादी करने और परिवार को बिना बताए इतना बड़ा फैसला लेने के लिए खूब खरी-खोटी सुनाई।
फिर रंजीत ने विद्या की ओर प्यार से देखते हुए कहा, “बेटी, तुम आराम करो। घर में नई-नई आई हो, तुम्हें किसी बात की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।”
राज यह सब सुनकर चुपचाप खड़ा रहा। उसे अब एहसास हो रहा था कि दो दिन बाद होने वाली शादी की रस्में उनके लिए बहुत बड़ी परीक्षा बनने वाली थीं।
घर में शादी की खबर फैलते ही पड़ोस की कई महिलाएँ राज और विद्या को बधाई देने के लिए आने लगीं। कोई विद्या के लिए मिठाई लेकर आई, तो कोई उसके गहनों और साड़ी की तारीफ़ करने लगी। सोनिया भी अपनी भाभी के पास बैठी रही और उत्साह से सबको विद्या के बारे में बताती रही।
विद्या सबके बीच बैठकर मुस्कुराती रही, लेकिन उसके मन में एक ही डर था—कहीं इन पड़ोस की महिलाओं में से किसी को उसके बारे में कोई शक न हो जाए। तभी एक पड़ोसन ने मुस्कुराकर कहा, “बहू तो बहुत सुशील लग रही है, शादी की तैयारियाँ भी खूब होंगी!”
शादी का मुहूर्त नज़दीक आते ही घर में महिला संगीत का कार्यक्रम रखा गया। आँगन को फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया। पड़ोस की महिलाएँ और परिवार की सभी महिलाएँ इकट्ठा होकर गीत गाने और नाचने लगीं।
सोनिया ने अपनी भाभी विद्या का हाथ पकड़कर उसे भी कार्यक्रम में शामिल कर लिया। विद्या पहले थोड़ी झिझकी, लेकिन फिर मुस्कुराते हुए महिलाओं के साथ बैठ गई। ढोलक की थाप और शादी के गीतों से पूरा घर खुशियों से गूंज उठा।
राज दूर खड़ा यह सब देख रहा था। उसे एक तरफ अपनी योजना की चिंता थी, तो दूसरी तरफ यह देखकर हैरानी हो रही थी कि विद्या ने इतने कम समय में उसके परिवार के साथ कितनी अच्छी तरह घुलना-मिलना शुरू कर दिया था।

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