फोटोशूट के लिए इस बार तीनों को एक ही थीम में तैयार किया गया। राम और रमेश ने पारंपरिक साड़ियाँ पहनीं, जबकि सिद्धार्थ को एक परिपक्व और गरिमामयी महिला का रूप दिया गया।
राम ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए आईने में खुद को देखा और बोला, “यार, मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि मैं सच में ऐसा दिख रहा हूँ।”
रमेश ने हँसकर कहा, “अब तो कैमरे के सामने मुस्कुराना भी सीख लो।”
सिद्धार्थ ने अपने किरदार को पूरी गंभीरता से निभाते हुए दोनों को देखा और कहा, “तुम दोनों बहुत शरारती हो। ठीक से खड़े हो जाओ, फोटो होने वाली है।”
मैं उनके पास जाकर खड़ा हो गया। तीनों ने अपने-अपने अंदाज़ में पोज़ दिया—राम थोड़ा संकोची, रमेश बेहद मस्तीभरा और सिद्धार्थ शांत एवं आत्मविश्वासी।
कैमरा क्लिक होते ही आसपास खड़ी लड़कियाँ तालियाँ बजाने लगीं। राम आखिरकार हँस पड़ा।
“ठीक है,” उसने कहा, “आज की फोटो शायद मैं जिंदगी भर नहीं भूलूँगा।”
रमेश ने तुरंत जवाब दिया, “और मैं तो इसे फ्रेम करवाऊँगा!”
सिद्धार्थ भी मुस्कुराया। उस पल तीनों की झिझक पूरी तरह खत्म हो चुकी थी और पूरा समूह इस मज़ेदार अनुभव का आनंद ले रहा था।
फोटोशूट का अगला हिस्सा शुरू हुआ तो आयोजकों ने राम, रमेश और सिद्धार्थ—तीनों को एक साथ मंच के बीच में बुलाया। इस बार तीनों महिला-वेश में थे, लेकिन उनके रूप और अंदाज़ अलग-अलग थे।
राम ने साड़ी, चूड़ियाँ और फूलों से सजा हुआ पारंपरिक रूप अपनाया था। रमेश भी साड़ी और पारंपरिक आभूषणों में था, लेकिन वह पूरे समय मज़ाक करता हुआ अपनी हँसी रोक नहीं पा रहा था। सिद्धार्थ ने एक परिपक्व और गरिमामयी महिला का रूप धारण किया था और अपने किरदार को इतनी गंभीरता से निभा रहा था कि बाकी दोनों बार-बार हँस पड़ते थे।
मैं उनके पास जाकर खड़ा हुआ।
“चलो, तीनों एक साथ,” फोटोग्राफर ने कहा।
राम ने अपना पल्लू ठीक किया, रमेश ने कैमरे की ओर देखकर मुस्कुराया और सिद्धार्थ ने बिल्कुल शांत, आत्मविश्वासी अंदाज़ में हाथ कमर पर रख लिया।
पहली तस्वीर क्लिक हुई।
दूसरी तस्वीर से पहले रमेश ने राम से फुसफुसाकर कहा, “इतना गंभीर क्यों हो? मुस्कुरा भी दो।”
राम ने जवाब दिया, “तुम्हारी वजह से हँसी आ रही है!”
सिद्धार्थ ने दोनों को देखते हुए कहा, “अगर तुम दोनों ने शरारत बंद नहीं की तो मैं अकेले ही फोटो खिंचवा लूँगा।”
यह सुनकर मैं और आसपास खड़े सभी लोग हँस पड़े।
फोटोग्राफर ने उसी पल कैमरा क्लिक कर दिया।
इस बार तस्वीर में राम और रमेश की हँसी, सिद्धार्थ का आत्मविश्वास और मेरे साथ उनकी दोस्ती—सब एक साथ कैद हो गया।
फोटो देखने के बाद राम ने सिर हिलाते हुए कहा, “मानना पड़ेगा, हम तीनों साथ में काफी अलग दिख रहे हैं।”
रमेश ने मुस्कुराकर कहा, “अलग नहीं—यादगार!”
सिद्धार्थ ने भी हँसते हुए हामी भरी। उस शाम का वह समूह-फोटो पूरे फेस्टिवल की सबसे चर्चित तस्वीरों में से एक बन गया।
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