Family · Hindi

बरसात की वह रात

बरसात की वह रात Cover Image
Completed | Part 5 of 6 | 0 Likes

Part 5

Part 5 Image

मैंने कहा,
“मैंने बहुत सोच-विचार किया है। मैं अपने जीवन को पूरी तरह एक महिला के रूप में जीना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि मेरा शरीर भी मेरी पहचान के अनुरूप हो।”
श्याम ने मेरा हाथ थामकर कहा,
“अगर यही तुम्हारी सच्ची इच्छा है, तो मैं तुम्हारे साथ हूँ।”
कलावती माँ की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखते हुए कहा,
“बेटी, तू जैसा जीवन अपने मन से चुनना चाहती है, मैं उसमें तेरा साथ दूँगी।”
इसके बाद मैंने विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह लेकर अपने शरीर में चिकित्सकीय परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की। यह आसान रास्ता नहीं था। कई बार डर लगा, कई बार मन में सवाल उठे, लेकिन हर कदम के साथ मुझे लगा कि मैं अपने भीतर की पहचान के और करीब पहुँच रही हूँ।
समय के साथ मेरे शरीर में बदलाव आने लगे। अंततः मैंने लिंग-पुष्टि संबंधी चिकित्सा और सर्जरी की प्रक्रिया पूरी की और अपने आपको पूरी तरह महिला के रूप में स्वीकार किया।
आईने के सामने खड़ी होकर मैंने खुद को देखा। उस पल मुझे लगा कि वर्षों से जिस पहचान को मैं अपने भीतर महसूस करती आई थी, अब उसे अपने जीवन में पूरी तरह अपना चुकी हूँ।
मैं अब सिर्फ दूसरों की नजर में विद्या नहीं थी।
मैं स्वयं को विद्या मानती थी।
श्याम मेरे पास आया और बोला,
“अब तुम्हें किसी रूप में ढलने की जरूरत नहीं है। तुम जैसी हो, मेरे लिए वही मेरी विद्या हो।”
कलावती माँ ने मुझे गले लगाकर कहा,
“बेटी, आज तू अपने मन की जिंदगी जी रही है। इससे बड़ी खुशी मेरे लिए और क्या होगी।”
उस दिन मुझे लगा कि मेरा सफर सागर से विद्या बनने तक नहीं था; यह अपने भीतर की सच्ची पहचान को स्वीकार करने का सफर था।
विवाह के बाद वह रात हमारे जीवन की सबसे खास रातों में से एक थी।
कमरे में हल्की रोशनी थी और बाहर रात बिल्कुल शांत थी। मैं दुल्हन के रूप में श्याम के सामने बैठी थी। मन में खुशी भी थी और वर्षों की भावनाएँ भी उमड़ रही थीं।
श्याम मेरे पास आया और कुछ देर तक मुझे देखता रहा। फिर उसने धीरे से मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर कहा,
“विद्या, आज मैं तुम्हें किसी बीती हुई याद के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवनसाथी के रूप में देख रहा हूँ।”
मेरी आँखें नम हो गईं।
मैंने कहा,
“और आज मुझे भी पहली बार लग रहा है कि मैं अपने जीवन को पूरी तरह अपने मन के अनुसार जी रही हूँ।”
श्याम ने मुझे विश्वास दिलाया कि हमारे रिश्ते की नींव प्रेम, सम्मान और विश्वास पर होगी।
हम दोनों ने उस रात अपने बीते हुए दुखों को पीछे छोड़कर एक नए जीवन की शुरुआत करने का संकल्प लिया। देर रात तक हम एक-दूसरे से बातें करते रहे—पुरानी यादों, आने वाले कल और अपने सपनों के बारे में।
उस रात हमारे बीच सिर्फ विवाह का रिश्ता नहीं बना था, बल्कि एक-दूसरे के प्रति गहरा विश्वास भी जन्मा था।
मेरी आँखें बंद थीं पर मुझे अहसास हो रहा था कि वो मेरी तरफ आ रहा है।

मैंने आँखें खोलीं, उठकर बैठ गई थी ।
विद्या में देखकर श्याम का लंड सलामी देने लगा।
तभी विद्या ने लहंगा-चोली निकाल फेंका और श्याम ऊपर चढ़ गई।
वह मैं पागलों की तरह चूमने-चाटने लगी।
अचानक हुए हमले से श्याम समझ गया विद्या आज पूरी अच्छे से सुहागरात मनाने वाली है!
आख़िर वो एक फौजी था हट्टा कट्टा वो भी कहा विद्या को छोड़ने वाला था
विद्या ने श्याम लोअर नीचे खींचा और लंड चूसने लगी।
श्याम का लंड अब विकराल रूप ले चुका था।
5 मिनट लंड चूसने के बाद विद्या ने पोजिशन ली और श्याम लंड पर बैठने लगी। आज पहली काफ़ी दिनों बाद कसाव महसूस हुआ था।5-6 बार ऊपर-नीचे करने के बाद श्याम का पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया।
उसकी चूत एकदम तपती हुई भट्टी थी। लंड को गरम-गरम अहसास हो रहा था चूत में कसाव था। मजा आ रहा था।श्याम का माल जल्दी गिरने वाला नहीं था। विद्या जोर-जोर से उछल रही थी।उसकी चूत पानी छोड़ चुकी थी। श्याम का लंड पानी से भीगा हुआ था।विद्या इतना जोर-जोर से उछल रही थी कि पूरा लंड बाहर निकालकर अंदर ले रही थी। अचानक श्याम का लंड उसके गांड में चला गया। अभी टोपा ही घुसा होगा कि विद्या बकरी के मेमने की तरह चिल्लाई- ईईई माँ! वहाँ नहीं! वहाँ नहीं! अब कमान श्याम ने अपने हाथ में ली, नीचे से जोरदार धक्का मारा। मेरा आधा लंड उसकी गांड चीरते हुए अंदर गया।विद्या की जोरदार चीख निकली।पर मैंने उसे ऊपर से दबाए रखा और नीचे से धक्के लगाने लगा। विद्या उठने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने पकड़ कमजोर नहीं होने दी और गांड में धक्के लगाने लगा।सच में एकदम टाइट गांड थी उसकी। अब पूरा लंड अब विद्या की गांड में अंदर-बाहर होने लगा।मतलब उसे गांड चुदाई का मजा आ रहा था।अब विद्या की गांड गोल-गोल घुमाने लगी थी जिससे श्याम का लंड पूरे तनाव में था और किसी भी पल माल निकाल सकता था।

जो लंड विद्या के चूत को 25 मिनट तक चोदने के बाद झड़ा था, वो विद्या की गांड में 20 मिनट में भी झड़ गया। विद्या ने श्याम होंठों पर किस किया और साइड में लेट गई।मेरे लंड पर थोड़ा खून, और मेरा वीर्य लगा हुआ था।
सुबह जब खिड़की से सूरज की पहली किरण कमरे में आई, तो मुझे लगा जैसे मेरे जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है।
अब मैं पूरी तरह विद्या—श्याम की पत्नी और कलावती की बहू बन चुकी थी।

153 Views 0 Comments
Disclaimer

CD Stories is a multilingual open platform. Stories published are generated by writers. The platform has not reviewed, modified, or validated contents and holds no liability regarding content quality or copyright infringements.

Discussion (0)

No comments shared yet. Be the first to share your thoughts!
Want to comment? Please Login or Sign Up.
Reading preferences
100%
Home Discover 0 Alerts Writers Login