पड़ोस के लड़कियों के कॉलेज में आयोजित गेम्स फेस्टिवल के आखिरी दिन के लिए मैंने लाल साड़ी चुनी। इस फेस्टिवल का मुख्य मकसद चैरिटी के लिए फंड इकट्ठा करना था। इसमें हिस्सा लेने के लिए कई लड़कों के कॉलेजों को भी बुलाया गया था। एक रिवाज था कि जो लोग गेम्स में हार जाते थे, उन्हें आखिरी पार्टी के लिए लड़कियों के पारंपरिक कपड़े पहनने होते थे। बहुत से लोग टिकट के लिए मोटी रकम देकर इस इवेंट को देखने आते थे। मेरा सबसे अच्छा दोस्त राम ही वह था जिसने मुकाबला जीता था, इसलिए हमारे कॉलेज से वही अकेला था जिसने पुरुषों के कपड़े पहने थे। आखिर में फोटो-शूट का सेशन हुआ। मैं राम के पीछे खड़ी थी और उसके कंधे पर हाथ रखे हुए थी। मेरे पीछे उसी कॉलेज के रमेश और सिद्धार्थ थे जिन्होंने हाफ-साड़ी पहनी थी और बाकी लोग दूसरे लड़कों के कॉलेजों से थे। दूसरे कॉलेज के उन शरारती लड़कों को हाफ-साड़ी पहने और सबके सामने लड़कियों की तरह तैयार हुए देखना वाकई मज़ेदार था। उस दिन कई लड़कियों ने मेरी तारीफ़ की कि मैंने साड़ी पहनकर एक महिला की तरह कैसे व्यवहार किया, जबकि दूसरों ने हाफ-साड़ी पहनी थी। लड़कियों ने मुझे उनके आने वाले इवेंट्स में भी लड़की बनकर हिस्सा लेने के लिए कहा। मुझे खुशी है कि मैं सेमी-फ़ाइनल में मैच हार गई, वरना मुझे सबके सामने साड़ी पहनने और हाथों में चूड़ियों की खनक और बालों में लगे चमेली के फूलों की खुशबू और वज़न महसूस करने का मौका नहीं मिलता। मुझे यकीन है कि राम लड़कियों वाली ये सारी मज़ेदार चीज़ें मिस कर रहा होगा।
Part 1
444 Views
0 Comments
Disclaimer
CD Stories is a multilingual open platform. Stories published are generated by writers. The platform has not reviewed, modified, or validated contents and holds no liability regarding content quality or copyright infringements.
Reading preferences
100%
Discussion (0)