Spouse · Hindi

प्रस्ताव

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In Progress | Part 10 of 10 | 0 Likes

Part 10

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कमरे में एकदम सन्नाटा छा गया। अर्जुन ने प्रिया के कंधे के पीछे से झांककर देखा, भारी काजल लगी उसकी आँखें सदमे से चौड़ी हो गई थीं। एक दूसरी जीवन रेखा? क्या यह मुमकिन था कि वे विक्रम से बच सकें?

"मुझे तुम्हारी मदद नहीं चाहिए," प्रिया ने कहा, हालांकि उसकी आवाज़ थोड़ी कांप रही थी।

"मैं आज तुम्हारा पूरा होम लोन चुका दूंगा," रोहन ने बहुत सपाट आवाज़ में कहा। "तीन करोड़ रुपये, दस मिनट के अंदर सीधे तुम्हारे बैंक में ट्रांसफर हो जाएंगे। मैं तुम्हारी लग्ज़री गाड़ियों का कर्ज़ भी उतार दूंगा। और मैं अर्जुन को ज़िंदगी भर के लिए घर खर्च के तौर पर हर महीने दो लाख रुपये दूंगा।"

अर्जुन ने ज़ोर से साँस खींची। वह पैसा ऐशो-आराम से जीने के लिए काफी था। उसे खुद को बदलना नहीं पड़ेगा। वह अपना घर रख सकता था। वह अपनी साड़ियां, अपना मेकअप, अपनी पैडिंग सब रख सकता था। वह बिल्कुल वैसे ही रह सकता था, शांति से अपने घर के काम करते हुए। यह एक बहुत ही खूबसूरत सपना था।

"क्यों?" प्रिया ने पूछा, गहरे शक के कारण उसकी आँखें सिकुड़ गईं। "तुम कोई दान-पुण्य नहीं करते, रोहन। तुम्हें इसके बदले में क्या चाहिए? तुम्हें अर्जुन तो नहीं चाहिए। तुम गे नहीं हो।"

"तुम बहुत समझदार हो, प्रिया। नहीं, मुझे साड़ी पहने हुए आदमियों में कोई दिलचस्पी नहीं है," रोहन ने अर्जुन की तरफ एक बहुत ही तिरस्कार भरी नज़र डालते हुए कहा। फिर, उसकी ठंडी, गहरी आँखें पूरी तरह से प्रिया पर टिक गईं। "मुझे तुम चाहिए।"

प्रिया वहीं जम गई।

"पाँच साल पहले, तुम मेरी कंपनी से बाहर चली गई थीं," रोहन ने कहा, उसकी आवाज़ नीची होकर एक अंधेरी, और डरावनी गुर्राहट में बदल गई। "तुम बहुत ज़्यादा घमंडी थीं। बहुत आज़ाद। बहुत हुक्म चलाने वाली। तुमने मेरे सामने अपना सिर झुकाने से साफ इंकार कर दिया था। मुझे तुम्हारी उस बात से हमेशा से नफरत रही है। मैं हमेशा से तुम्हारे अंदर की उस आग को कुचलना चाहता था।"

रोहन ने प्रिया की ओर धीरे से एक कदम बढ़ाया। "मेरी शर्तें बिल्कुल साफ हैं। मैं सारे कर्ज़ चुका दूंगा। अर्जुन यहीं रहेगा, इस इतने बड़े घर में। वह एक रानी की तरह रहेगा, जिसके पास पैसों की कोई कमी नहीं होगी, वह अपने घर के काम करेगा, अपने भारी गहने पहनेगा, अपने लंबे बाल रखेगा और अपनी इस औरतों वाली ज़िंदगी को हमेशा के लिए ऐसे ही जीएगा। वह पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा।"

रोहन ने अपनी छड़ी का सिरा सीधे प्रिया की छाती की तरफ कर दिया। "लेकिन तुम, प्रिया, आज अपना एक छोटा सा बैग पैक करोगी। तुम मेरे पेंटहाउस (penthouse) में रहने आओगी। तुम हमेशा के लिए कॉर्पोरेट दुनिया छोड़ दोगी। तुम अपना यह घमंडी, और डोमिनेंट रवैया पूरी तरह से छोड़ दोगी। तुम मेरी एक पूरी तरह से आज्ञाकारी नौकरानी बनोगी।"

प्रिया का मुँह शुद्ध खौफ से खुला का खुला रह गया।

"तुम वही कपड़े पहनोगी जो मैं तुम्हें पहनने को कहूंगा," रोहन ने कहना जारी रखा, और उसके चेहरे पर एक क्रूर मुस्कान आ गई। "तुम घुटनों पर बैठोगी जब मैं तुम्हें घुटनों पर बैठने को कहूंगा। तुम मेरे मेहमानों की सेवा करोगी। तुम अपनी सारी ताकत और कंट्रोल मुझे सौंप दोगी। मैं तुम्हारा पूरी तरह से मालिक बनूंगा।"

"नहीं!" अर्जुन चिल्लाया, और अपनी ब्लॉक हील्स को संगमरमर पर ज़ोर से पटकते हुए प्रिया के पीछे से बाहर आ गया। एक प्यार करने वाले जीवनसाथी के रूप में उसका हिफ़ाज़त करने वाला स्वभाव उसके गहरे डर को चीरते हुए बाहर आ गया था। "वह एक बहुत ही प्राउड और इंडिपेंडेंट औरत है! तुम उसके साथ ऐसा नहीं कर सकते! तुम उसकी आत्मा को कुचल दोगे!"

रोहन हँसा, एक बहुत ही ठंडी और खाली आवाज़ में। "यही तो मेरा मकसद है, अर्जुन। मैं उसकी आत्मा को कुचलना चाहता हूँ। और बिल्कुल विक्रम के उस नियम की तरह... अगर प्रिया मेरे साथ आती है, तो तुम दोनों फिर कभी एक-दूसरे को किसी लवर की तरह नहीं छू सकते। मुझे उसके शरीर और उसके दिमाग पर पूरा और एक्सक्लूसिव अधिकार चाहिए।"

रोहन ने कमरे के कोने में लगी बड़ी सी ग्रैंडफादर क्लॉक की तरफ देखा। सुबह के 8:00 बज रहे थे।

"विक्रम यहाँ दो घंटे में पहुँच जाएगा," रोहन ने स्मूथ आवाज़ में कहा, और सामने वाले दरवाज़े की तरफ मुड़ा। "अगर तुम्हें मेरी डील मंज़ूर है, प्रिया, तो 9:30 बजे अपने बैग के साथ मेरे पेंटहाउस के बाहर आ जाना। अगर तुम नहीं आईं, तो मैं यह मान लूंगा कि तुमने अर्जुन को विक्रम के उस घटिया कंट्रोल में सौंपने का फैसला कर लिया है।"

रोहन ने सामने का दरवाज़ा खोला और सुबह की धूप में बाहर निकल गया, पीछे दरवाज़ा पूरा खुला छोड़ दिया।

लिविंग रूम के अंदर, सन्नाटा पूरी तरह से बहरा कर देने वाला था।

तबाही अब अपने चरम पर थी। वे एक जलते हुए कमरे के बीचों-बीच खड़े थे, और उनके पास बचने के लिए सिर्फ एक पैराशूट था।

प्रिया खुले दरवाज़े के बाहर घूर रही थी, उसका चेहरा पीला पड़ गया था। वह जन्म से ही एक लीडर थी। उसकी पूरी पहचान, उसका अभिमान, और उसका मानसिक संतुलन ही आज़ाद रहने, कमान संभालने, और अपने उस पति की हिफ़ाज़त करने पर टिका था जिससे वह बेइंतहा प्यार करती थी। रोहन जैसे एक क्रूर, और टॉक्सिक आदमी के सामने झुकने का मतलब था कि वह अंदर से पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। यह हर दिन एक मानसिक यातना सहने जैसा होगा।

अर्जुन ने टेलीविज़न की डार्क स्क्रीन में अपनी परछाई को देखा। उसने अपनी लाल साड़ी, अपनी बड़ी पैडिंग, अपना भारी मेकअप और अपने खूबसूरत गहनों को देखा। विक्रम के पास जाने का मतलब था अपने शरीर को एक क्रूर आदमी को सौंपना, एक ऐसे आदमी की मानसिक यातना सहना जिसने उसका पीछा किया था, और अपनी शारीरिक आज़ादी को खोना।

लेकिन अगर उन्होंने दोनों आदमियों को ना कह दिया, तो वे सब कुछ खो देंगे, और अर्जुन को वापस एक आदमी बनना पड़ेगा, जो उसे अंदर से मार देगा।

उनके पास सिर्फ दो घंटे बचे थे।

अपनी आर्थिक ज़िंदगी बचाने के लिए, उन दोनों में से किसी एक को एक राक्षस के सामने पूरी तरह से सरेंडर करना होगा।

प्रिया धीरे से अर्जुन की तरफ देखने के लिए मुड़ी। अर्जुन धीरे से प्रिया की तरफ देखने के लिए मुड़ा। उन दोनों के चेहरे पर आँसू बह रहे थे। वे एक-दूसरे से बेइंतहा, पागलों की तरह प्यार करते थे। और अब, उन्हें यह चुनना था कि दूसरे को बचाने के लिए उन दोनों में से कौन अपनी पूरी आत्मा की बलि चढ़ाने वाला था।

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