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अन्धकार

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Part 4

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चौथी और पाँचवीं घूँट के बाद सागर के शरीर की बनावट में बदलाव और स्पष्ट होने लगा। उसके कंधे धीरे-धीरे संकरे हुए और कमर अधिक स्पष्ट आकार लेने लगी।
छठी घूँट के बाद परिवर्तन स्थिर हो गया। शीशे में देखते हुए सागर ने महसूस किया कि उसका नया शरीर अब पूरी तरह स्त्री-सदृश अनुपात में बदल चुका था—लगभग 36 इंच बस्ट, 32 इंच कमर और 36 इंच हिप।
अब उसके चेहरे, आवाज़, बाल और शरीर की बनावट—सभी एक ही रूप के अनुरूप थे। उसने कुछ पल तक खुद को शीशे में देखा और फिर राज की ओर मुड़ गया।
“अब तो मेरा पूरा रूप ही बदल चुका है।”
राज ने सिर हिलाया।
“हाँ। अब तुम्हारा गेटअप और तुम्हारा बदला हुआ रूप एक-दूसरे से बिल्कुल मेल खाते हैं।”
राज और सागर “अन्धकार” के थिएटर में पहुँच चुके थे। प्रवेश की शर्त साफ थी—हर जोड़ी में एक लड़का और एक लड़की होना चाहिए। राज सामान्य रूप से लड़का था, जबकि सागर लड़की के गेटअप में उसके साथ आया था।

अंदर पहुँचने पर दोनों को complimentary drink दी गई।

सागर ने पहली घूँट ली।

पहली घूँट: सबसे पहले उसके गले में गर्माहट हुई और उसकी आवाज़ बदल गई। अगली बार जब उसने राज को पुकारा, तो उसकी आवाज़ पहले से कहीं अधिक स्त्रैण थी।

दूसरी घूँट: गर्माहट चेहरे तक पहुँची। उसके चेहरे की पुरुष-सदृश कठोरता धीरे-धीरे कम होने लगी और चेहरे की रेखाएँ नरम दिखाई देने लगीं।

तीसरी घूँट: उसके बालों में परिवर्तन शुरू हुआ। वे तेजी से बढ़कर कंधों तक पहुँच गए। अब उसका चेहरा और बाल उसके लड़की वाले गेटअप के साथ अधिक स्वाभाविक लगने लगे।

चौथी घूँट: बदलाव गर्दन से नीचे शरीर तक पहुँच गया। कंधे धीरे-धीरे संकरे हुए और कमर का आकार अधिक स्पष्ट होने लगा। सागर ने महसूस किया कि उसके कपड़े भी बदलती हुई शारीरिक बनावट के अनुसार फिट होने लगे हैं।

पाँचवीं घूँट: शरीर की बनावट में परिवर्तन और स्पष्ट हुआ। उसका बाहरी आकार धीरे-धीरे अधिक स्त्री-सदृश होता गया। अब उसके चेहरे, बाल और शरीर के बदलाव एक-दूसरे के अनुरूप दिखाई दे रहे थे।

छठी और अंतिम घूँट: आखिरी sip लेते ही पहले हुए सभी परिवर्तन स्थिर हो गए। उसके नए शरीर की बनावट लगभग 36 इंच बस्ट, 32 इंच कमर और 36 इंच हिप के अनुपात में आ गई।

सागर ने शीशे में खुद को देखा। अब आवाज़, चेहरा, बाल और शरीर—सब उसके लड़की वाले रूप के अनुरूप थे।

राज ने हैरानी से कहा, “अब तो किसी को शक भी नहीं होगा कि तुम यहाँ किस तरह आए थे।”

सागर ने बदली हुई आवाज़ में धीरे से जवाब दिया, “लेकिन मुझे अभी भी याद है कि मैं यहाँ कैसे आया था।”

तभी थिएटर की सारी लाइटें बंद हो गईं।

उसी समय “अन्धकार” की शुरुआत हुई।

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