शादी की रस्में पूरी होने के बाद मैं प्रिया के साथ फोटो खिंचवा रहा था। तभी रोहिणी आंटी ने मुझे पास बुलाया।
रोहिणी: विनीत, तुम्हें याद है मैंने कहा था कि तुम्हारे लिए एक सरप्राइज़ है?
मैं: जी आंटी, विदेश यात्रा वाले टिकट तो मिल गए। अब और क्या है?
रोहिणी: यह देखो।
उन्होंने मुझे एक छोटा-सा डिब्बा दिया। मैंने खोला तो उसमें एक सुंदर-सी घड़ी थी।
मैं: आंटी, यह तो बहुत अच्छी है!
रोहिणी: यह तुम्हारे लिए है। और इसके पीछे एक छोटा-सा संदेश भी है।
मैंने घड़ी पलटकर देखी। पीछे लिखा था—
“अपनी मेहनत पर भरोसा रखना। — रोहिणी”
मैं कुछ पल चुप रहा।
मैं: आंटी, मैं इसे हमेशा संभालकर रखूँगा।
रोहिणी: और हाँ, अब अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना। कॉलेज में भी खूब मेहनत करना।
मैं: पक्का। इस बार मैं किसी से शर्त नहीं लगाऊँगा।
प्रिया: अरे, शर्त क्यों नहीं? अगली बार तो मैं लगाऊँगी!
मैंने उसकी तरफ देखा।
मैं: तुमसे कोई शर्त नहीं लगानी। तुम तो पहले ही मुझे फँसा चुकी हो!
प्रिया हँस पड़ी।
प्रिया: अच्छा बाबा, अब नहीं फँसाऊँगी।
तभी मम्मी हमारे पास आईं।
माँ: विनीत, अब घर चलने का समय हो गया है। लेकिन जाने से पहले रोहिणी आंटी को धन्यवाद तो बोलो।
मैंने रोहिणी आंटी को गले लगाया।
मैं: धन्यवाद आंटी। आज का दिन मैं कभी नहीं भूलूँगा।
रोहिणी: मैं भी नहीं। और याद रखना, तुम हमारे परिवार के बहुत खास हो।
घर लौटते समय प्रिया मेरे साथ बैठी थी। रास्ते में उसने धीरे से कहा—
प्रिया: विनीत, सच बताऊँ? मुझे लगा था तुम बहुत नाराज़ हो जाओगे।
मैं: हुआ था। लेकिन अब ठीक हूँ।
प्रिया: सॉरी। मैंने मज़ाक थोड़ा ज़्यादा कर दिया।
मैं: हाँ, किया तो था। लेकिन तुमने मेरी मदद भी की थी। इसलिए माफ़ किया।
प्रिया मुस्कुराई।
प्रिया: तो अब दोस्ती पक्की?
मैं: पक्की।
हम दोनों ने हाथ मिलाया।
घर पहुँचकर मैंने घड़ी अपने कमरे में रखी और आईने में खुद को देखा। सुबह की घबराहट अब नहीं थी। मुझे लगा कि आज मैंने सिर्फ़ एक शर्त नहीं, बल्कि अपने बारे में भी कुछ नया सीखा है।
अगले दिन मैंने रोहिणी आंटी को फोन किया।
मैं: आंटी, आपकी शादी की फोटो बहुत अच्छी आई हैं। मैं आपको भेज दूँ?
रोहिणी: हाँ, और अपनी भी भेजना। तुम तो कल पूरे समारोह की जान थे!
मैं हँस पड़ा।
मैं: आंटी, अब बस भी कीजिए!
रोहिणी: अच्छा, अच्छा। अब बताओ, कॉलेज की तैयारी कैसी चल रही है?
मैं: अच्छी चल रही है। और मैंने तय किया है कि कॉलेज में भी लड़कियों की काबिलियत का सम्मान करूँगा।
रोहिणी: यही तो सुनना चाहती थी।
फोन रखने के बाद मैंने अपनी किताबें निकालीं और पढ़ने बैठ गया। बाहर से प्रिया की आवाज़ आई—
प्रिया: विनीत! जल्दी आओ, तुम्हारे लिए एक और सरप्राइज़ है!
मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया—
मैं: अब कौन-सी शर्त है?
प्रिया: इस बार कोई शर्त नहीं। बस तुम्हारे लिए एक चॉकलेट है!
मैं हँसते हुए बाहर चला गया।
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