Friends · Hindi

अन्धकार

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Completed | Part 10 of 12 | 0 Likes

Part 10

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सिनेमाघर से बाहर निकलने के बाद दोनों काफी देर तक चुपचाप चलते रहे।

राज के पास बहुत सारे सवाल थे, लेकिन वह जानता था कि आर्या ने अभी-अभी अपनी पूरी पहचान को एक नए तरीके से स्वीकार किया था।

कुछ दूर जाकर उसने धीरे से पूछा,

“आर्या... क्या तुम्हें सागर की जिंदगी याद आ रही है?”

आर्या रुक गई।

“सागर की जिंदगी मेरी ही जिंदगी थी, राज। मैं उसे मिटाना नहीं चाहती।”

उसकी आँखों में हल्की नमी थी।

“मैं वही इंसान हूँ जिसने तुम्हारे साथ दोस्ती की, तुम्हारे साथ हँसा, तुम्हारे साथ फिल्म देखने आया। बस अब मुझे अपने बारे में एक और सच पता चला है।”

राज ने उसका हाथ थाम लिया।

“तो फिर तुम्हें कुछ खोना नहीं है। मैं तुम्हें सागर कहूँ या आर्या... मेरे लिए तुम वही इंसान हो।”

आर्या ने उसकी तरफ देखा।

उसके चेहरे पर पहली बार पूरी शांति दिखाई दी।

“यही बात मुझे सबसे ज्यादा डराती थी।”

“क्यों?”

“क्योंकि मुझे लगा था कि अगर मेरी पहचान बदल गई तो शायद तुम भी बदल जाओगे।”

राज ने मुस्कुराकर कहा,

“तुम्हारी पहचान बदली है। हमारी दोस्ती नहीं।”

कुछ पल बाद आर्या ने उसका हाथ और मजबूती से पकड़ लिया।

“और अगर मैं कहूँ कि मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे आर्या के रूप में स्वीकार करो?”

राज ने बिना किसी झिझक के कहा,

“मैं पहले से कर चुका हूँ।”

सोनू की पहली निशानी

घर पहुँचकर आर्या ने पुरानी तस्वीर मेज पर रखी।

तस्वीर के पीछे सोनू का नाम था।

लेकिन कोई पता नहीं।

कोई तारीख नहीं।

सिर्फ एक छोटा-सा चिन्ह था—एक नीला सितारा।

राज ने तस्वीर को ध्यान से देखा।

“यह कोई निशान हो सकता है।”

आर्या ने आँखें बंद कीं।

उसे पिछले जन्म की धुंधली याद आने लगी।

एक पुरानी सड़क...

एक छोटी-सी किताबों की दुकान...

और सोनू की आवाज़—

“अगर कभी मुझे ढूँढना पड़े, तो नीले सितारे को ढूँढना।”

आर्या ने तुरंत आँखें खोल दीं।

“राज! मुझे जगह याद आ गई।”

अगली सुबह दोनों उस पुराने इलाके में पहुँचे।

बहुत कुछ बदल चुका था। सड़कें नई थीं, दुकानें बदल चुकी थीं।

लेकिन एक पुरानी इमारत अब भी खड़ी थी।

उसके दरवाज़े के ऊपर एक छोटा-सा नीला सितारा बना हुआ था।

आर्या की धड़कन तेज हो गई।

“यही है।”

राज ने दरवाज़ा खोला।

अंदर धूल से भरी पुरानी किताबें थीं।

काउंटर के पीछे एक बुज़ुर्ग व्यक्ति बैठा था।

आर्या ने तस्वीर सामने रखी।

“क्या आप इस व्यक्ति को जानते हैं?”

बुज़ुर्ग ने तस्वीर देखते ही चश्मा उतार दिया।

कुछ क्षण वह तस्वीर को देखता रहा।

फिर उसने आर्या की ओर देखा।

“तुम...”

आर्या का दिल जैसे रुक गया।

“क्या आप सोनू को जानते हैं?”

बुज़ुर्ग ने धीरे से कहा—

“सोनू को तो मैं बहुत अच्छी तरह जानता था।”

राज ने पूछा,

“था?”

बुज़ुर्ग ने कोई जवाब नहीं दिया।

उसने काउंटर के नीचे से एक पुराना लिफाफा निकाला।

उस पर सिर्फ एक नाम लिखा था—

आर्या।

आर्या के हाथ काँपने लगे।

“यह मेरे लिए है?”

बुज़ुर्ग ने कहा,

“सोनू ने इसे बहुत साल पहले मेरे पास छोड़ा था।”

आर्या ने लिफाफा खोला।

अंदर एक छोटा-सा पत्र था।

पहली पंक्ति पढ़ते ही उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े—

“आर्या, अगर तुम यह पत्र पढ़ रही हो, तो इसका मतलब है कि अन्धकार ने अपना वादा पूरा कर दिया।”

राज ने उसकी ओर देखा।

आर्या ने पत्र को सीने से लगा लिया।

सोनू शायद कहीं था।

लेकिन अब सवाल यह था—

क्या वह अभी भी उसी दुनिया में था... या वह भी किसी दूसरे जन्म में अपनी पहचान खोज रहा था?
आर्या ने काँपते हाथों से सोनू का पत्र खोला।

पत्र में लिखा था—

“आर्या, अगर तुम यह पढ़ रही हो, तो तुम्हें अपना पिछला जन्म याद आने लगा होगा। लेकिन मुझे इस जन्म में तुम्हें ढूँढना नहीं है। मुझे यकीन है कि इस बार हम एक-दूसरे को किसी और रिश्ते में पहचानेंगे।”

आर्या की आँखें पत्र पर टिक गईं।

“किसी और रिश्ते में?”

राज ने पूछा, “आगे क्या लिखा है?”

आर्या ने अगली पंक्ति पढ़ी—

“इस जन्म में मैं तुम्हारा दोस्त नहीं हूँ। मैं तुम्हारा भाई हूँ।”

आर्या स्तब्ध रह गई।

उसी क्षण उसके फोन पर घर से संदेश आया—

“तुम्हारा छोटा भाई सोनू तुम्हें लेने आ रहा है।”

आर्या के हाथ से पत्र लगभग छूट गया।

कुछ देर बाद दरवाज़े पर एक युवक दिखाई दिया।

आर्या ने उसे देखते ही पहचान लिया—हालाँकि उसकी शक्ल वर्तमान जन्म में अलग थी।

वही आँखें।

वही मुस्कान।

और हाथ में वही छोटा-सा नीला सितारा वाला लॉकेट।

“सोनू...?”

युवक ने मुस्कुराकर कहा,

“हाँ, दीदी।”

आर्या की आँखों में आँसू आ गए।

उसे पिछले जन्म की सारी बातें याद आने लगीं—सोनू उसका सबसे करीबी दोस्त था, उसने उसकी तस्वीर खींची थी और अन्धकार के रहस्य को सुरक्षित रखा था।

लेकिन इस जन्म में उनका रिश्ता बदल चुका था।

अब सोनू उसका छोटा भाई था।

आर्या ने उसे गले लगा लिया।

सोनू को कुछ समझ नहीं आया।

“दीदी, आप रो क्यों रही हो?”

आर्या ने उसके सिर पर हाथ रखा।

“बस... ऐसा लग रहा है जैसे मैं तुम्हें बहुत पहले से जानती हूँ।”

राज कुछ दूरी पर खड़ा यह सब देख रहा था।

उसने समझ लिया कि आर्या को अपने पिछले जन्म का एक और महत्वपूर्ण रिश्ता वापस मिल गया है।

सोनू ने अचानक राज की ओर देखा।

फिर मुस्कुराकर बोला,

“आप राज हैं न?”

राज चौंका।

“तुम मेरा नाम कैसे जानते हो?”

सोनू की मुस्कान गायब हो गई।

उसने धीरे से कहा—

“क्योंकि मैंने आपको भी पहले देखा है।”

कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।

आर्या ने उसकी ओर देखा।

“कहाँ?”

सोनू ने अपनी जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली।

तस्वीर में तीन लोग थे—

आर्या, सोनू... और राज।

आर्या ने तस्वीर को देखते ही पहचान लिया।

लेकिन तस्वीर के पीछे लिखी तारीख देखकर उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

वह तारीख तीस साल पुरानी नहीं थी।

वह तारीख थी—

अगले महीने की।

आर्या ने राज की ओर देखा।

अब उसे समझ आ गया था कि अन्धकार ने केवल अतीत नहीं दिखाया था।

वह भविष्य की घटनाएँ भी पहले से दर्ज कर रहा था।

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