Friends · Hindi

अन्धकार

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Part 1

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दो दोस्त एक मूवी देखने जाते हैं जिसका नाम अन्धकार होता है।इस फिल्म को देखने के लिए युगल होना ज़रूरी था।
इसलिए राज और सागर फिल्म देख सकते थे, क्योंकि बाहर से वे एक लड़का और एक लड़की के रूप में दिखाई दे रहे थे। सागर का असल में लड़का होना मायने नहीं रखता—ज़रूरी शर्त सिर्फ यह थी कि जोड़ी में एक व्यक्ति लड़की के रूप में हो। राज और सागर शहर के सबसे रहस्यमयी सिनेमाघर में पहुँचे। आज वहाँ एक खास फिल्म लगी थी—“अन्धकार”।
फिल्म की सबसे अजीब शर्त थी—उसे देखने के लिए युगल होना ज़रूरी था, यानी एक लड़का और एक लड़की। राज लड़के के रूप में ही था, जबकि सागर ने लड़की का गेटअप किया हुआ था। लंबे बालों की विग, हल्का मेकअप और लड़कियों जैसे कपड़े—दूर से देखने पर कोई भी उसे लड़की ही समझता।
टिकट चेक करने वाले ने दोनों को देखा और मुस्कुराकर अंदर जाने दिया।
“एक लड़का, एक लड़की। ठीक है,” उसने कहा।
अंदर पहुँचते ही एक कर्मचारी ने उन्हें दो टिकटों के साथ complimentary drinks दीं।
“फिल्म की तरफ से,” उसने कहा। “खास मेहमानों के लिए।”
राज ने अपना गिलास उठा लिया, लेकिन सागर ने पहले उसे सूँघा।
“कुछ अजीब सी खुशबू है,” सागर ने कहा।
“पागल मत बन। पी ले,” राज हँसते हुए बोला।
सागर ने आखिरकार एक छोटी-सी sip ली।
उसी क्षण उसके गले में हल्की-सी गर्माहट दौड़ गई।
वह कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक उसकी आवाज़ बदल गई।
“राज... ये ड्रिंक—”
सागर खुद अपनी आवाज़ सुनकर रुक गया।
उसकी आवाज़ अब पहले जैसी भारी नहीं थी। उसमें एक साफ़, मुलायम और स्त्रैण स्वर आ गया था।
राज ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।
“एक मिनट... तेरी आवाज़ को क्या हुआ?”
सागर ने घबराकर अपना गला छुआ।
“मुझे नहीं पता...”
लेकिन इस बार भी उसके मुँह से निकली आवाज़ पूरी तरह लड़की जैसी थी।
राज ने मज़ाक करने की कोशिश की।
“शायद ड्रिंक का असर है।”
सागर ने गिलास को देखा।
“मैं इसे और नहीं पी रहा।”
लेकिन तभी स्क्रीन पर फिल्म शुरू होने से पहले एक अजीब संदेश दिखाई दिया—
“अन्धकार में प्रवेश करने के लिए पहला परिवर्तन आवश्यक है।”
दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।
सागर ने धीरे से गिलास नीचे रख दिया।
“राज... मुझे लगता है इस ड्रिंक में कुछ गड़बड़ है।”
राज ने गिलास उठाकर देखा। उसके अंदर बचा हुआ पेय बिल्कुल सामान्य दिखाई दे रहा था।
फिर सागर को अपने बालों में हलचल महसूस हुई।
उसने घबराकर सिर छुआ।
विग के नीचे उसके असली बाल जैसे अचानक बदलने लगे थे।
राज की आँखें फैल गईं।
“सागर... तेरे बाल...”
सागर ने शीशे में अपना चेहरा देखा।
उसके चेहरे की बनावट पहले से थोड़ी अलग दिखाई दे रही थी।
वह पीछे हट गया।
“राज... ये क्या हो रहा है?”
राज के पास कोई जवाब नहीं था।
सागर ने काँपते हुए गिलास की ओर देखा।
पहली sip ने सिर्फ उसकी आवाज़ बदली थी।
लेकिन गिलास में अभी भी काफी ड्रिंक बाकी थी।
दूसरी घूँट
सागर ने कुछ देर तक गिलास को देखा, फिर डरते-डरते दूसरी sip ले ली।
इस बार असर पहले से तेज था।
उसके चेहरे की कठोरता धीरे-धीरे कम होने लगी। जबड़े की बनावट थोड़ी मुलायम हुई और चेहरे की रेखाएँ अधिक स्त्रैण दिखाई देने लगीं। उसकी भौंहें भी पहले से पतली और सुघड़ लगने लगीं।
सागर ने घबराकर राज से पूछा—
“मेरे चेहरे पर सच में बदलाव हो रहा है?”
राज ने सिर हिलाया।
“हाँ... और इस बार साफ दिखाई दे रहा है।”
तीसरी घूँट
सागर ने काँपते हाथों से तीसरी sip ली।
कुछ ही सेकंड में उसके बालों में बदलाव शुरू हो गया। विग के नीचे से बाल तेजी से बढ़ने लगे और उसके कंधों तक पहुँच गए।
सागर ने बालों को हाथ में लिया।
“ये नकली नहीं हैं... ये मेरे असली बाल हैं!”
अब उसका लड़की वाला गेटअप केवल वेशभूषा नहीं रह गया था।
चौथी घूँट
चौथी sip के बाद उसके शरीर की बनावट बदलने लगी।
उसके कंधे थोड़े संकरे हुए, कमर अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी और उसका पूरा शरीर धीरे-धीरे स्त्री-सदृश आकार लेने लगा।
सागर अपनी सीट पर सीधा बैठ गया।
“राज... इसे रोकने का कोई तरीका है?”
राज ने गिलास छीनने की कोशिश की।
लेकिन सागर ने उसे रोक दिया।
क्योंकि उसी क्षण स्क्रीन पर लिखा आया—
“परिवर्तन आधा पूरा हो चुका है।”
पाँचवीं घूँट
सागर ने पाँचवीं sip ली।
इस बार बदलाव उसके हाथों और पैरों तक पहुँचा। उसके हाथ छोटे और अधिक नाज़ुक दिखाई देने लगे। चेहरे की बनावट भी अब इतनी बदल चुकी थी कि राज कुछ पल तक उसे पहचानता ही रह गया।
सागर ने धीमी, बदली हुई आवाज़ में पूछा—
“राज... अब मैं कैसा दिख रहा हूँ?”
राज कुछ कह नहीं पाया।
कुछ सेकंड बाद उसने बस इतना कहा—
“अगर मैं तुम्हें पहले से नहीं जानता होता... तो मैं तुम्हें सागर नहीं पहचान पाता।”
छठी घूँट
अब गिलास में केवल थोड़ी-सी ड्रिंक बची थी।
सागर समझ गया कि आखिरी sip सबसे महत्वपूर्ण होगी।
उसने गिलास को देखा।
फिर स्क्रीन की ओर।
वहाँ लिखा था—
“अन्तिम घूँट — अंतिम पहचान।”
सागर ने राज की तरफ देखा।
“अगर मैंने इसे पी लिया... तो क्या मैं वापस पहले जैसा हो पाऊँगा?”
राज के पास इसका कोई जवाब नहीं था।
सागर ने धीरे से गिलास उठाया।
और जैसे ही आखिरी बूंद उसके होंठों तक पहुँची...
पूरे सिनेमाघर की लाइट बंद हो गई।
स्क्रीन पर केवल एक शब्द दिखाई दिया—
“अन्धकार।”

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