रिया और मनव की कहानी: इंसाफ का दिन
मनव की आँखें उस कागज़ पर टिकी थीं, जिस पर लिखा था कि वह अपनी सारी संपत्ति और बैंक खाते रिया के नाम कर रहा है। उसने तुरंत मना कर दिया। तभी रिया ने एक के बाद एक वीडियो दिखाने शुरू किए – मनव साड़ी पहने घर के काम कर रहा था, फिर पीहू उसे औरत बना रही थी... शर्म और गुस्से से मनव का चेहरा लाल हो गया।
रिया ने शर्त रखी: "अगर तुम मेरी बात मानोगे, तो यहाँ रह सकते हो। लेकिन मेरी नौकरानी बनकर। मैं तुमसे ज्यादा कमाती हूँ, तुम्हें काम पर जाने की ज़रूरत नहीं। ये लो, तुम्हारे लिए कपड़े लाई हूँ।"
बैग में साड़ी, पेटीकोट, ब्रा, पैंटी, चूड़ियाँ और एक मंगलसूत्र था। दूसरे बैग में पंजाबी सूट और सलवार-कमीज। रिया बोली, "आज से तुम्हारी जगह बेडरूम में नहीं, किचन में है। और हाँ, ये डिवोर्स पेपर साइन कर लो। अपने आप को मर्द मानना बंद कर दो। अब तुम मेरी हाउसवाइफ हो। पर्सनल! और मैं कल अपने बॉयफ्रेंड से शादी कर रही हूँ, वह तुम्हारी तरह नर्मदिल नहीं है।"
मनव टूट चुका था। उसके पास कोई रास्ता नहीं था। उसने सारी शर्तें मान लीं। अगले कुछ सालों तक, उसने अपने ही घर में नौकरानी का जीवन जिया। रिया अब दूसरे की पत्नी थी, और मनव को उसे दूसरे की बाँहों में देखकर गुस्सा आता, लेकिन वह खुद को ही जिम्मेदार मानता। पीहू भी उसका मज़ाक उड़ाती, उसे ताने मारती, पर मनव हर दिन उसके कड़वे बोलों का घूँट पी जाता।
धीरे-धीरे, मनव और भी ज्यादा स्त्रैण दिखने लगा। रिया उसके खाने में एस्ट्रोजन मिलाने लगी थी। उसके बाल अब कंधों तक आ गए थे। एक दिन, उसका पुराना दोस्त राज उससे मिलने आया। घर पर सिर्फ मनव (अब मनवी) थी। उसने हिचकिचाते हुए राज को अपना सारा दुःख सुनाया।
राज, एक अमीर बिजनेसमैन, गुस्से से भर गया। उसने कहा, "तू फिक्र मत कर, इसका बदला हम लेंगे। लेकिन सच बता, क्या तुझे सचमुच अब औरत बनकर जीना है?"
मनवी ने आँसू भरी आवाज़ में कहा, "नहीं... मैं घुट-घुटकर जी रही हूँ। इससे अच्छा मर जाऊँ।"
राज ने दृढ़ता से कहा, "नहीं, अब हम सबका बदला लेंगे।"
कुछ महीनों बाद, राज ने रिया की कंपनी को एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया। जानबूझकर, उसने अपना नुकसान करवाया और कानूनी तौर पर रिया की कंपनी पर इल्ज़ाम लगा दिया। कर्ज़ इतना बड़ा था कि रिया और उसके पति को अपनी संपत्ति बेचकर भी चुकाना पड़ा। वही संपत्ति राज के आदमी ने खरीदी और वापस मनवी के नाम करवा दी।
रिया की कंपनी डूब चुकी थी। घर में खाने के पैसे तक नहीं थे। आखिरकार, उन लोगों ने मनवी को सड़क पर छोड़ दिया, क्योंकि अब वह घर भी नहीं रहा। लेकिन अब वही घर मनवी का था, जहाँ वह आज़ादी से रहने लगी। राज ने यही चाल पीहू के साथ भी चली और उसे भी बर्बाद कर दिया।
अब दोनों "बेस्टी" कंगाल हो चुकी थीं। रिया का पति भी उसे छोड़कर चला गया। कुछ दिन बाद, राज मनवी से मिलने आया और पूछा, "क्या तुम मुझसे शादी करोगी?"
मनवी ने बिना एक पल गवाए हाँ कह दी। आखिरकार, उसे वह सम्मान और प्यार मिला जिसका वह हकदार था।
आज, मनवी और राज एक सुखी जीवन जी रहे हैं। कभी-कभी, मनवी रिया और पीहू के बारे में सोचती है, जो शायद अपने किए की सजा भुगत रही होंगी। लेकिन फिर वह मुस्कुराती है, और दिल से उन्हें माफ़ कर देती है। क्योंकि अब उसके पास सबसे बड़ा बदला था – शांति, सम्मान और सच्चा प्यार।
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